जीवन के रास्ते पर तुम्हे
अकेले ही चलना पड़ेगा. किसी के भी भरोसे मत रहो, सिर्फ अपने भरोसे रहो. एक मंत्र
याद कर लो ‘एकला चलो रे’. चाहें कैसी भी परिस्थिति आये. सिर्फ उसके
भरोसे काम करों, जो पूछना है उससे पूछो जो तुम्हारे अन्दर हैं. कोई किताब, कोई
गुरु, कोई दूसरा तुम्हे ये नहीं बता सकता की तुम क्या चाहते हो सिवाय उसके जो
तुम्हारे अन्दर हैं. किसी का सहारा लेने की सोचो भी मत. हा किसी का सहारा बन सको
तो ठीक हैं.
“It’s never too late to do the right things” “आशावादी होने में क्या कष्ट है? रो तो कभी भी सकते हैं।” - लूसिमार सांतोस द लीमा
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पतली रस्सी और बड़ा हाथी
दोस्तों आज की कहानी कोई नई कहानी नहीं हैं, ये कहानी मुझसे, आपसे और उन सब लोगो की कहानी है जो अपनी ताकत से अनजान हैं. जो अपने को सही से नहीं जानते। जिनको लगता है की वो कुछ बड़ा काम नहीं कर सकते. जिनको नहीं पता की वो क्या क्या कर सकते है. जो ये सोचते है की हम कुछ नहीं कर सकते हैं. क्योंकि उनका मानना है की उनके अंदर वो खुबिया नहीं है जो दूसरे सफल लोगो में हैं. इस कहानी को पड़ने के बाद किसी बधे हुए हाथी को जरूर देखे और अपने आप से पूछे की - क्या हाथी इस रस्सी को नहीं तोड सकता है, जिससे वो बधा हैं?
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